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Showing posts from November 13, 2025

प्रयागराज में Circle Rate क्या है 2026 | ज़मीन और बिल्डिंग की सर्किल रेट की पूरी जानकारी

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प्रयागराज: अगर आप 2026 में प्रयागराज में कोई ज़मीन या संपत्ति खरीदने-बेचने की सोच रहे हैं, तो Circle Rate जानना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। सर्किल रेट वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिस पर किसी भूमि या संपत्ति की रजिस्ट्री सरकार द्वारा मान्य मानी जाती है। Circle Rate क्या होता है? Circle Rate या Ready Reckoner Rate वह दर है जिसे राज्य सरकार द्वारा तय किया जाता है। यह दर बताती है कि किसी विशेष क्षेत्र में प्रति वर्ग मीटर या प्रति वर्ग फुट भूमि या भवन का न्यूनतम मूल्य क्या होना चाहिए। उदाहरण के लिए — अगर किसी क्षेत्र की सर्किल रेट ₹30,000 प्रति वर्गमीटर है, तो उस क्षेत्र में संपत्ति की रजिस्ट्री ₹30,000/वर्गमीटर से कम पर नहीं की जा सकती। Circle Rate जमीन की होती है या बिल्डिंग की? सर्किल रेट दोनों के लिए होती है — भूमि (Land) के लिए: प्रति वर्ग मीटर या प्रति वर्ग फुट के हिसाब से तय होती है। भवन (Building) के लिए: निर्माण के प्रकार (पक्का, कच्चा, RCC, Commercial आदि) के अनुसार निर्धारित की जाती है। Circle Rate कौन तय करता है? हर जिले में सर्किल रेट को जिला प्रशास...

प्रयागराज में Commercial Property किराये पर देने की कानूनी प्रक्रिया 2026

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  प्रयागराज में Commercial Property किराये पर देने की कानूनी प्रक्रिया 2026 प्रयागराज उत्तर प्रदेश का तेजी से विकसित होता शहर है, जहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। यदि आपके पास कोई Commercial Property है और आप उसे किराये पर देना चाहते हैं, तो आपको कुछ कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। यह लेख आपको प्रयागराज में Commercial Property किराये पर देने की कानूनी प्रक्रिया 2026  के बारे में पूरी जानकारी देगा। 1️⃣ किरायेदार का चयन और सत्यापन सबसे पहले किरायेदार का चयन सोच-समझकर करें। हमेशा किरायेदार का Police Verification कराना आवश्यक है। इसके लिए प्रयागराज के स्थानीय थाने में किरायेदार का फॉर्म जमा करें। इससे भविष्य में विवाद या अवैध गतिविधियों की स्थिति में सुरक्षा बनी रहती है। 2️⃣ Rent Agreement तैयार करें Commercial Property के लिए एक कानूनी Rent Agreement अनिवार्य होता है। इसमें किराया राशि, अवधि, सुरक्षा जमा (Security Deposit), संपत्ति उपयोग की शर्तें, रखरखाव और नोटिस अवधि जैसे सभी नियम स्पष्ट रूप से लिखे जाने चाहिए। 3️⃣ रजिस्ट्री या नोटरी से प्...

प्रयागराज में मकान किराये पर देने की कानूनी और व्यावहारिक प्रक्रिया 2026

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  प्रयागराज में मकान किराये पर देने की कानूनी और व्यावहारिक प्रक्रिया 2026 प्रयागराज में प्रॉपर्टी रेंट पर देना आजकल एक सामान्य और लाभदायक विकल्प बन गया है। चाहे आपके पास फ्लैट हो, स्वतंत्र मकान या कोई कमर्शियल स्पेस — किराये पर देना आय का एक स्थिर स्रोत बन सकता है। लेकिन इसके साथ कानूनी और व्यावहारिक जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी होती हैं। आइए जानते हैं, प्रयागराज में मकान किराये पर देने की पूरी प्रक्रिया 2026 । 1️⃣ किरायेदार चुनने से पहले जांच-पड़ताल करें किरायेदार चुनते समय केवल मौखिक भरोसे पर न जाएं। किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना जरूरी है। इसके लिए निकटतम थाने में फॉर्म भरकर किरायेदार की जानकारी जमा करें। यह प्रक्रिया कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है और भविष्य में विवादों से बचाती है। 2️⃣ किरायानामा (Rent Agreement) बनवाना जरूरी है हर किराये के लेन-देन को रेंट एग्रीमेंट के माध्यम से लिखित रूप में किया जाना चाहिए। इसमें किराया राशि, अवधि, जमा राशि, रखरखाव और बिजली-पानी बिल जैसे सभी शर्तें स्पष्ट लिखी होनी चाहिए। प्रयागराज में 11 महीने का एग्रीमेंट आमतौर पर बनाया जाता है।...

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले ज़रूर जानें: खसरा-खतौनी, फ्रीहोल्ड और लीज़ लैंड जैसे ज़रूरी शब्दों का मतलब

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  परिचय अगर आप कोई ज़मीन या मकान खरीदने जा रहे हैं, तो “खसरा-खतौनी”, “फ्रीहोल्ड”, “लीज़ लैंड” जैसे शब्द अक्सर सुनने को मिलते हैं। लेकिन बहुत से लोग इन शब्दों का सही मतलब नहीं जानते। इनकी जानकारी न होने पर प्रॉपर्टी खरीदते समय धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ जाता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ये शब्द क्या होते हैं और प्रॉपर्टी खरीदते समय इनका क्या महत्व है।   खसरा क्या होता है? खसरा नंबर किसी ज़मीन के विशिष्ट टुकड़े की पहचान संख्या होती है। हर ज़मीन का एक अलग खसरा नंबर होता है जिसे राजस्व विभाग रिकॉर्ड करता है। यह नंबर गाँव या क्षेत्रवार रजिस्टर में दर्ज रहता है। इसके माध्यम से यह पता चलता है कि ज़मीन किसके नाम पर दर्ज है। ऑनलाइन खसरा जानकारी अब राजस्व विभाग की वेबसाइट पर आसानी से देखी जा सकती है।  सारांश: खसरा नंबर = ज़मीन की पहचान संख्या। खतौनी क्या होती है? खतौनी उस रिकॉर्ड को कहते हैं जिसमें यह विवरण होता है कि कौन-कौन व्यक्ति किस खसरा नंबर की ज़मीन का मालिक है। इसमें यह भी दर्ज होता है कि ज़मीन खेती योग्य है या आबादी की, और क्या उस पर कोई बंधक या विवाद है। खतौनी में दर्ज ...